महाप्रबंधक ने चोपन-चुनार-प्रयागराज रेलखंड का किया निरीक्षण, विकास कार्यों में तेजी के निर्देश

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने बुधवार को प्रयागराज-चुनार-चोपन रेलखंड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेलपथ, परिचालन व्यवस्था और रेलवे परिसंपत्तियों की स्थिति का जायजा लेने के साथ ही विभिन्न स्टेशनों पर चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान प्रयागराज मंडल के मंडल रेल प्रबंधक रजनीश अग्रवाल सहित मंडल के शाखाधिकारी और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

महाप्रबंधक ने विंडो-ट्रेलिंग निरीक्षण के दौरान रेलपथ एवं ट्रैक, ओएचई, सिग्नलिंग, परिचालन व्यवस्था, पुल-पुलियों, समपार फाटकों और अन्य रेलवे परिसंपत्तियों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने रेल परिचालन में संरक्षा और दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण और अनुरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके बाद महाप्रबंधक ने चुर्क, सोनभद्र, सक्तेशगढ़ और चुनार स्टेशनों पर चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन और प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।

सोनभद्र स्टेशन पर निर्माणाधीन 12 मीटर चौड़े फुट ओवरब्रिज की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्होंने निर्माण कार्य जल्द पूरा करने को कहा। वहीं सक्तेशगढ़ स्टेशन पर पुराने स्टेशन भवन का निरीक्षण करते हुए आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य कर भवन को उपयोग के योग्य बनाने के निर्देश दिए।

चुनार स्टेशन पर निर्माणाधीन छह मीटर चौड़े फुट ओवरब्रिज का निरीक्षण करते हुए महाप्रबंधक ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर जल्द गर्डर लॉन्चिंग का कार्य सुनिश्चित करने को कहा। यात्रियों की सुविधा और आवागमन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने स्टेशन पर प्रवेश और निकास की अलग-अलग व्यवस्था विकसित करने के विकल्प तलाशने का सुझाव दिया।

उन्होंने प्लेटफॉर्म संख्या तीन और चार के बीच फेंसिंग की ऊंचाई बढ़ाने के भी निर्देश दिए, ताकि यात्रियों की संरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अनधिकृत आवागमन को नियंत्रित किया जा सके।

महाप्रबंधक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास कार्य यात्रियों की सुविधा, संरक्षा और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। उन्होंने रेल परिचालन की दक्षता बढ़ाने, यात्री सुविधाओं में सुधार, आधारभूत संरचना को मजबूत करने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे परिसंपत्तियों के विकास पर विशेष जोर दिया।