पपीता सहित नकदी फसलों को नुकसान पर मुआवजा न मिलने से किसानों में आक्रोश

आलापुर (अंबेडकर नगर)। प्राकृतिक आपदाओं से धान, गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों को हुए नुकसान पर किसानों को मुआवजा दिया जाता है, लेकिन अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से पपीता, अमरूद, आम, आंवला सहित अन्य फलदार फसलों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान होने पर प्रशासन की ओर से नजरअंदाज किए जाने का आरोप लग रहा है। इससे क्षेत्र के किसानों में आक्रोश व्याप्त है।

बीते दिनों आए तूफान और आंधी-पानी के कारण पपीते की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कराए जा रहे फसल क्षति सर्वेक्षण में पपीते की खेती को शामिल नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते प्रभावित किसान मुआवजे से वंचित रह सकते हैं।

ग्राम तरेम निवासी संतोष कुमार सिंह प्राकृतिक खेती संस्थान के नोडल पर्सन हैं। उनके यहां लगभग दो एकड़ में पोषण वाटिका विकसित की गई है। इस बगीचे में आम की देशी, कलमी और विदेशी किस्मों के साथ अमरूद, लीची, मौसंबी, नींबू, जामुन, सहजन, कटहल, बेर, नाशपाती, लोगन, आलूबुखारा, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, जामरूद, संतरा, माल्टा, करौंदा, मीठा करौंदा, इमली, मीठी इमली, बेल, चेरी, आंवला और सेब सहित विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे तैयार किए गए हैं। अमरूद की दस किस्मों के मदर प्लांट भी यहां मौजूद हैं। इनमें कई पौधे फल भी दे रहे हैं।

संतोष कुमार सिंह ने बताया कि बगीचे में सहफसली खेती के रूप में पपीते के लगभग 500 पौधे लगाए गए थे। तूफान के कारण पपीते के फलदार पौधे जमीन पर गिर गए और फल पकने से पहले ही नष्ट हो गए। इससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है।

इसी तरह बांसगांव, सुदामा नगर निवासी किसान शैलेन्द्र सिंह ने अपने खेतों में पपीते के लगभग एक हजार पौधे लगाए थे। अक्टूबर माह में कई बार आई आंधी और बारिश के कारण पौधे जमीन पर गिर गए। जमीन पर पड़े रहने से पपीते में सड़न शुरू हो गई, जिससे उनकी फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई। किसानों के अनुसार दोनों किसानों को मिलाकर करीब दस लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

प्रभावित किसानों का कहना है कि वे अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ फलदार और नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं, ताकि कम समय में बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकें। लेकिन प्राकृतिक आपदा में इन फसलों के बर्बाद होने पर प्रशासन की ओर से न तो उचित सर्वे कराया जा रहा है और न ही आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों का सवाल है कि जब फलदार और नकदी फसलें भी उनकी आजीविका का प्रमुख साधन हैं, तो उन्हें फसल क्षति के सर्वे से बाहर क्यों रखा जा रहा है?

भारतीय जनता पार्टी के सह शोध प्रमुख संतोष कुमार सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि पपीता, अमरूद, आम, आंवला सहित सभी फलदार एवं नकदी फसलों को फसल क्षति सर्वेक्षण में शामिल किया जाए। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों का निष्पक्ष सर्वे कराकर उन्हें उचित आर्थिक सहायता एवं मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके और वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।