नारी सशक्त तो राष्ट्र समृद्ध, बेटियों की उड़ान से बदलेगा देश का भविष्य, उत्कृष्ट कार्य करने वाली 35 महिलाओं को मिला कर्मयोगिनी सम्मान सारनाथ में आयोजित संगोष्ठी में कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्à

 

वाराणसी। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जी नेगी ने कहा कि समाज, देश व परिवार के निर्माण में महिला व पुरुष का महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। कहा कि जिस देश की नारी सशक्त होगी वह देश स्वतः ही मजबूत व समृद्ध होगा। यह बात उन्होंने बुधवार को तिब्बती संस्थान के अतिशा सभागार में पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सशक्त होती भारत की बेटियां विषयक संगोष्ठी में कही। इस दौरान समाज व देश हित में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 35 महिलाओं को कर्मयोगिनी सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश के सदस्य सुनीता श्रीवास्तव ने कहा कि महिला को सम्मान नहीं समझना चाहिए, बल्कि उसे सम्मान देना चाहिए। महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त होने पर ही कोई भी देश विकसित हो सकता है।

राष्ट्र निर्माण में भी महिलाओं ने अग्रणी भूमिका निभाई है, इसका उदाहरण महारानी अहिल्या बाई होलकर झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, दुर्गावती आदि ने पेश किया है। महिला आयोग लखनऊ की पूर्व सदस्य मीना चौबे ने कहा कि बेटियां सबल हो रही हैं सशक्त हो रही हैं। वैदिक परम्परा व पुरातन परम्परा में मातृ शक्ति का बहुत ही योगदान है। महिलाएं वर्तमान में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कहा कि कुटुंब के रक्षा की जिम्मेदारी भी नारी की है। महात्मा महात्मा गांधी हिंदी पत्रकारिता संस्थान विद्यापीठ के पूर्व निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि नारी सशक्तिकरण का अर्थ है कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, समान अधिकार और अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता देना है। जब एक महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर होती है तो पूरा परिवार व समाज स्वस्थ तथा समृद्ध बनता है। कार्यक्रम का संचालन मोनिका श्रीवास्तव व स्वागत डॉ. चेतना ने किया। अतिथियों का धन्यवाद प्रशांत गुप्ता ने किया।