चुनार जंक्शन पर रेल हादसे का मॉक ड्रिल, एनडीआरएफ ने कोच काटकर बचाए यात्रियों की जान

चुनार जंक्शन पर रेल हादसे का मॉक ड्रिल, एनडीआरएफ ने कोच काटकर बचाए यात्रियों की जान

रेलवे, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की 200 सदस्यीय टीम ने किया संयुक्त अभ्यास, आग बुझाने से लेकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने तक की परखी तैयारी

मिर्जापुर। रेल दुर्घटना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की जान बचाने और राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज मंडल के चुनार जंक्शन रेलवे स्टेशन पर रेलवे और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 11वीं बटालियन ने संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की। इस दौरान ट्रेन के पटरी से उतरने और एक कोच में आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर बचाव अभियान चलाया गया। अभ्यास में रेलवे, एनडीआरएफ और सिविल प्रशासन के लगभग 200 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाना और जनहानि को न्यूनतम करने की तैयारियों को परखना था।

ट्रेन के पटरी से उतरने और कोच में आग लगने की बनाई स्थिति

संयुक्त अभ्यास के दौरान गाड़ी संख्या 00123 दीनदयाल उपाध्याय नगर-प्रयागराज पैसेंजर के पटरी से उतरने और कोच संख्या एस-1 में आग लगने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। घटना की सूचना ट्रेन मैनेजर और लोको पायलट ने चुनार जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों और रेलवे नियंत्रण कक्ष को दी।

सूचना मिलते ही रेलवे, अग्निशमन, पुलिस और चिकित्सा विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। रेलवे कर्मचारियों और अग्निशमन कर्मियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पाने का अभ्यास किया। इसके साथ ही यात्रियों को सुरक्षित निकालने और घटनास्थल पर राहत कार्य संचालित करने की प्रक्रिया भी पूरी की गई।

कोच की खिड़की और छत काटकर निकाले गए घायल

अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने बचाव अभियान में विशेष तत्परता दिखाई। टीम के सदस्यों ने कोच की खिड़की और छत को काटकर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया। इसके बाद रोपवे की सहायता से घायल और बेहोश यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।

बचाए गए यात्रियों को एसपीएआरएमवी, प्रयागराज की चिकित्सा टीम को सौंपा गया। घायलों को प्राथमिक उपचार देने और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।

37 एनडीआरएफ कर्मियों ने लिया हिस्सा

एनडीआरएफ, वाराणसी की टीम का नेतृत्व सहायक कमांडेंट आशीष चौहान ने किया। अभ्यास में एनडीआरएफ के 37 जवानों ने भाग लिया। रेलवे के विभिन्न विभागों, सिविल डिफेंस, स्काउट एवं गाइड, एआरटी प्रयागराज, एसपीएआरएमवी प्रयागराज और मेडिकल टीम के साथ चुनार के जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन तथा चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

मॉक ड्रिल के दौरान टिकट निरीक्षक, ट्रेन मैनेजर, लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, कोच अटेंडेंट, मैकेनिक और स्टेशन कर्मचारियों की जिम्मेदारियों का भी अभ्यास किया गया। इसमें सूचना के आदान-प्रदान, आपातकालीन उपकरणों के उपयोग और घायलों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया।

अधिकारियों ने बेहतर आपदा प्रबंधन पर दिया जोर

अभ्यास के दौरान अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) एम. एम. वारिस, उत्तर मध्य रेलवे के उप मुख्य संरक्षा अधिकारी ओ. पी. सिंह, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी यू. सी. शुक्ला और एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट आशीष चौहान उपस्थित रहे।

अपर मंडल रेल प्रबंधक एम. एम. वारिस ने कहा कि संयुक्त अभ्यास से प्राप्त अनुभव के आधार पर आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली और तैयारियों को और प्रभावी बनाया जाएगा। रेलवे, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई कर जनहानि को कम करने में मदद मिलेगी।

वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी यू. सी. शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास रेल संरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से विभिन्न विभागों की तत्परता और कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है। अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करके वास्तविक दुर्घटनाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

वहीं, एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट आशीष चौहान ने कहा कि संयुक्त मॉक ड्रिल से बचाव दलों के बीच समन्वय, उपकरणों की कार्यक्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया की जांच होती है। ऐसे अभ्यास प्रत्येक जनपद में आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि दुर्घटना के समय स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए तेजी से राहत पहुंचाई जा सके।

चुनार जंक्शन पर आयोजित इस संयुक्त मॉक ड्रिल ने रेलवे, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की आपातकालीन तैयारियों को परखने का अवसर दिया। अभ्यास से प्राप्त अनुभव भविष्य में रेल दुर्घटनाओं के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक त्वरित तथा प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।