उत्तर रेलवे ने सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार के लिए लगाए विशेष शिविर, 550 रेलकर्मी और अधिकारी हुए शामिल

उत्तर रेलवे ने सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार के लिए लगाए विशेष शिविर, 550 रेलकर्मी और अधिकारी हुए शामिल

मुरादाबाद समेत 4 प्रमुख स्थानों पर आयोजित हुए शिविर, ओवरहेड उपकरणों के उन्नयन कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन पर जोर

उत्तर रेलवे ने रेल अवसंरचना के विकास कार्यों में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 2×25 केवी ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के उन्नयन कार्यों के लिए विशेष सुरक्षा एवं गुणवत्ता शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों का उद्देश्य कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाना और रेल परिचालन को सुरक्षित बनाए रखना रहा।

अक्टूबर 2026 में यह अभियान जालंधर में 1 अक्टूबर, अंबाला में 5 अक्टूबर, मुरादाबाद में 9 अक्टूबर और लखनऊ में 12 अक्टूबर को आयोजित किया गया। इन चारों स्थानों पर आयोजित शिविरों में कुल 550 अधिकारियों, रेलकर्मियों और कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारियों ने भाग लिया। इनमें 42 अधिकारी, मंडलीय विद्युत कर्षण वितरण विभाग के 169 कर्मचारी, अंबाला एवं लखनऊ विद्युतीकरण परियोजना इकाइयों के 112 कर्मचारी तथा ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के 227 कर्मचारी शामिल रहे।

कर्मचारियों की सुरक्षा और सुरक्षित रेल परिचालन पर विशेष जोर

शिविरों में तकनीकी प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के माध्यम से ओएचई उन्नयन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षित कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। कर्मचारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के उपयोग, कार्यस्थल पर सावधानियां बरतने और असुरक्षित गतिविधियों को रोकने के प्रति जागरूक किया गया।

रेलवे ट्रैक के नजदीक क्रेन, जेसीबी और खुदाई करने वाली मशीनों के सुरक्षित संचालन पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही रेल परिचालन, पटरियों, सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणालियों और अन्य रेलवे परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने की आवश्यकता बताई गई।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के दिए निर्देश

शिविरों में नींव निर्माण, ओएचई खंभों की स्थापना, उनके सही संरेखण और ग्राउटिंग के दौरान गुणवत्ता जांच के महत्व को समझाया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वीकृत नक्शों, तकनीकी मानकों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार कार्य करने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा फीडर वायर, सहायक विद्युत उपकरणों और संबंधित कार्यों को मौजूदा रेलवे ढांचे तथा विद्युत प्रवाहित ओएचई के आसपास सुरक्षित तरीके से पूरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर भी चर्चा

प्रतिकूल मौसम में कार्य करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, दुर्घटना की सूचना देने, आपातकालीन बचाव व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। अधिकारियों, परियोजना इकाइयों, पर्यवेक्षकों और ठेकेदारों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

शिविरों में कार्यस्थलों पर सामने आई सुरक्षा संबंधी घटनाओं, दुर्घटना की आशंका वाले मामलों और व्यावहारिक चुनौतियों से मिले अनुभव भी साझा किए गए, ताकि संभावित खतरों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

सुरक्षा और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्ध उत्तर रेलवे

उत्तर रेलवे के अनुसार, इन शिविरों से रेलवे अधिकारियों, परियोजना इकाइयों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिली है। अभियान के माध्यम से सुरक्षा संबंधी खतरों की समय रहते पहचान करने, तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन करने और कार्यस्थलों पर निरंतर सुधार की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया गया।

उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के उन्नयन कार्यों में कर्मचारियों की सुरक्षा, निर्बाध रेल परिचालन और रेलवे परिसंपत्तियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसी उद्देश्य के साथ रेलवे का संकल्प है? सुरक्षा पहले, गुणवत्ता हमेशा, कोई शॉर्टकट नहीं और कोई समझौता नहीं।

हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे