उत्तर पश्चिम रेलवे ने अक्टूबर में बनाया माल ढुलाई का नया रिकॉर्ड, पिछले साल से 14.9% की वृद्धि

उत्तर पश्चिम रेलवे ने अक्टूबर में बनाया माल ढुलाई का नया रिकॉर्ड, पिछले साल से 14.9% की वृद्धि

2.806 मिलियन टन माल का परिवहन, मालभाड़ा आय बढ़कर 342.9 करोड़ रुपये पहुंची

जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अक्टूबर 2026 में माल ढुलाई और परिचालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने अक्टूबर माह में 2.806 मिलियन टन माल का परिवहन कर अब तक का सर्वाधिक मासिक माल ढुलाई का रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 14.9 प्रतिशत अधिक है, जबकि निर्धारित लक्ष्य से भी 2.6 प्रतिशत ज्यादा रहा।

रेलवे की ओर से माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान के लाइम स्टोन सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को रेलमार्ग के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे स्थानीय उद्योगों को परिवहन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

अक्टूबर माह में माल ढुलाई से उत्तर पश्चिम रेलवे को 342.9 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई। यह पिछले वर्ष के अक्टूबर महीने की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अक्टूबर तक कुल 19.09 मिलियन टन माल का परिवहन किया जा चुका है। यह अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2022-23 में अक्टूबर तक 18.7 मिलियन टन माल ढुलाई का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।

जोनल इंटरचेंज में भी बनाया रिकॉर्ड

अक्टूबर माह में जोनल इंटरचेंज का औसत 319 ट्रेन प्रतिदिन रहा। यह निर्धारित लक्ष्य से 18.1 प्रतिशत और पिछले वर्ष की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक का सर्वाधिक दैनिक इंटरचेंज 8 अक्टूबर को 354 ट्रेन दर्ज किया गया। इसमें 173 ट्रेन टेकिंग ओवर और 181 ट्रेन हैंडिंग ओवर शामिल रहीं।

इसी दिन वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर भी 154 ट्रेनों का दैनिक इंटरचेंज दर्ज किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इसमें 75 ट्रेन टेकिंग ओवर और 79 ट्रेन हैंडिंग ओवर शामिल रहीं।

इसके अलावा किशनगढ़ बालावास इंटरचेंज पर अक्टूबर में 1,486 ट्रेनों का मासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इसमें 744 ट्रेन टेकिंग ओवर और 742 ट्रेन हैंडिंग ओवर रहीं। इससे पहले सितंबर 2026 में 1,376 ट्रेनों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।

उत्तर पश्चिम रेलवे की इन उपलब्धियों को माल परिवहन क्षमता में बढ़ोतरी, संसाधनों के बेहतर उपयोग, वैगन और इंजन की उत्पादकता में सुधार तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम बताया गया है।