आध्यात्मिक जागृति की अविरल सरिता में सम्पन्न हुआ 79वाँ निरंकारी संत समागम

अंकित कुमार / बागपत 

ब्रह्मज्ञान की वास्तविक सार्थकता उसे जीवन में अपनाने और अपने विचारों, व्यवहार एवं कर्मों में शामिल करने में है।? ये दिव्य भाव सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के समापन दिवस पर लाखों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने पावन आशीर्वचनों द्वारा प्रदान किए जागृति? की आध्यात्मिक प्रेरणाओं को अपने जीवन में आत्मसात कर स्वयं के उत्थान के साथ-साथ जगत कल्याण की भावना को सुदृढ़ करने वाला यह पावन संत समागम कल रात्रि प्रेमभक्ति एवं श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ। समागम से आध्यात्मिक प्रेरणा और मधुर स्मृतियां लेकर श्रद्धालु भक्तजन धीरे-धीरे अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान करने लगे।

 

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने विशाल मानव परिवार को सम्बोधित करते हुए अपने पावन प्रवचनों में फरमाया कि ?जागृति? केवल सत्संग या समागम तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर पल में निराकार परमात्मा के अहसास के साथ जीने का नाम है। ब्रह्मज्ञान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम इसे अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में अपनाएं सतगुरु माता जी ने सकारात्मक सोच, प्रेम, करुणा और विनम्रता अपनाने तथा दूसरों की कमियों के बजाय उनकी खूबियों को देखने की प्रेरणा दी। सच्ची जागृति का आरंभ अपने घर-परिवार और निजी जीवन से होता है। सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन का अभिन्न अंग मानकर हर परिस्थिति में परमात्मा का एहसास बनाए रखना ही जीवन को सुखमय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।

 

इस पावन अवसर पर हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु के पावन आशीष को प्राप्त किया। साथ ही, कई पार्षदों और विधायकों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

दिव्यांग संत महात्माओ हेतु व्यवस्थाएंः-* समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं की सुविधा के लिए सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर का प्रबंध किया गया था, ताकि वे आसानी से समारोह स्थल तक पहुंच सकें। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ कार्यक्रमों को देखने के लिए LED स्क्रीन भी लगाई गई थी। इसके अतिरिक्त, उन्हें समागम के दौरान सतगुरु के पावन दर्शन का भी लाभ मिला।

 

कायरोप्रैक्टिक शिविर एवं स्वास्थ्य सेवाएँः-* समागम में मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा व्यापक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। परिसर में 8 एलोपैथिक और 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी, 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, एक कायरोप्रैक्टिक शिविर तथा 15 आईसीयू सुविधाओं सहित 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया गया। आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस जिसमें 15 वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस का प्रबंध किया गया।

 

समागम के दौरान काइरोप्रैक्टिक शिविर में विदेशों और भारत से विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इन निस्वार्थ चिकित्सकों की उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल और उपचार से हजारों अस्वस्थ लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त, ईएनटी, नेत्र, बाल रोग, दंत चिकित्सा एवं मनोरोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा श्रद्धालुओं को व्यापक और सटीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। 

 

लंगर एवं कैंटीन व्यवस्थाः-* समागम परिसर में चार स्थानों पर सामुदायिक भोजन (लंगर) की व्यवस्था की गई, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं को दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। सभी को एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते देख ?वसुधैव कुटुम्बकम? की भावना साकार होती दिखाई दी। इसके अतिरिक्त 22 कैंटीनों में रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी एवं मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। इन सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सेवा, समानता और सहयोग की भावना को भी उजागर किया

 

इस अवसर पर संत निरंकारी मंडल के सचिव आदरणीय श्री जोगिंदर सुखीजा ने सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन दर्शन कर उनके दिव्य आशीर्वाद के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। साथ ही, समस्त साध-संगत तथा समागम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सरकारी विभागों का हार्दिक आभार प्रकट किया। उन्होंने इस वर्ष समागम में पिछले वर्षों की अपेक्षा अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और भविष्य में भी संगत की संख्या में निरंतर वृद्धि होने की मंगलकामना की।

इस वर्ष समागम के चारों दिन आयोजित कवि दरबार में बाल कवियों सहित महिला एवं पुरुष कवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया जो आकर्षण का एक मुख्य बिन्दू रहा। इस अवसर पर 80 कवियों ने ?जागृति? विषय पर आधारित अपनी स्वरचित कविताएँ हिंदी, राजस्थानी, पंजाबी, अंग्रेज़ी, हरियाणवी, मुल्तानी, मराठी, भोजपुरी एवं संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत कीं। इन भावपूर्ण काव्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया और सभी ने इस आयोजन का भरपूर आनंद प्राप्त किया इस प्रकार, 79वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम सतगुरु के दिव्य संदेश, प्रेम, भक्ति एवं मानवता के भावों से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ। निःसंदेह, यह पावन संत समागम आध्यात्मिक जागृति एवं सद्भाव का अनुपम संगम बना, जिसने अनेकता में एकता और संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में पिरोने का दिव्य संदेश दिया।