सुनिए कप्तान साहब अशोक कुमार मीणा! चकबंदी की सीमा का विवाद, फिर खूनी संघर्ष का आरोप; पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

सुनिए कप्तान साहब अशोक कुमार मीणा! चकबंदी की सीमा का विवाद, फिर खूनी संघर्ष का आरोप; पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

एक जमीन की सीमा का विवाद, बार-बार शिकायतें, कार्रवाई के इंतजार में बीतते दिन और आखिरकार खेत पर लाठी-भाले चलने का आरोप!

हरदोई/ माधौगंज

जनपद के माधौगंज थाना क्षेत्र ग्राम गौरा निवासी दिलीप यादव की ओर से जिलाधिकारी हरदोई को दिए गए प्रार्थना पत्र में चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

 

प्रार्थना पत्र के अनुसार,दिलीप यादव की भूमि ग्राम बघियारी में खाता संख्या 513 के गाटा संख्या 272 व 273 में कुल 2.61 हेक्टेयर दर्ज है। वहीं, निकटवर्ती ग्राम फैजपुरकम्पू के गाटा संख्या 675 और चक संख्या 570, 571, 801, 569 व 902 की नाप का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोनों गांवों की सीमा का निष्पक्ष निर्धारण कराने की मांग की थी। उनका दावा है कि फैजपुरकम्पू के गाटा संख्या 675 में लगभग 0.2530 हेक्टेयर भूमि अधिक और ग्राम बघियारी में उतनी ही भूमि कम दिखाई दे रही है।

 

दिलीप के मुताबिक,उन्होंने 25 सितंबर 2026 को चकबंदी अधिकारी बिलग्राम को प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद चकबंदी अधिकारी पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40015526101039 तथा बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40015526101036 के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। चकबंदी आयुक्त को ईमेल से भी अपनी समस्या से अवगत कराया।

 

आरोप है कि 6 अक्टूबर को चकबंदी लेखपाल और चकबंदी कर्ता मौके पर पहुंचे, लेकिन राजस्व टीम के बिना सीमा चिन्हित करने में असमर्थता जताकर लौट गए। इसके बाद 17 अक्टूबर को शिकायत के निस्तारण के दौरान भी नाप नहीं हो सकी। दिलीप का कहना है कि उस समय दूसरे पक्ष के कुछ लोग लाठी-डंडे, भाले और बंदूक लेकर खेत पर पहुंचे थे।

 

*22 अक्टूबर को क्या हुआ?*

 

प्रार्थना पत्र में दिलीप यादव ने आरोप लगाया है कि 22 अक्टूबर को चकबंदी कर्ता के फोन पर उन्हें मौके पर बुलाया गया। उन्होंने संभावित विवाद की आशंका जताते हुए पुलिस को साथ लाने की मांग की थी, लेकिन उनके अनुसार उन्हें विवाद न होने का आश्वासन दिया गया।

 

दिलीप का आरोप है कि मौके पर दूसरे पक्ष के लोग लाठी-डंडे और भाले लेकर पहुंचे। वह घटनाक्रम का वीडियो बना रहे थे, तभी उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया। शिकायत में बलवीर यादव समेत कई लोगों पर हमला करने और उनके परिजनों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। दिलीप के मुताबिक, उनके ताऊ राजबहादुर पर भाले से वार किया गया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। उन्होंने मेवालाल, कुलदीप और मुकेश समेत परिजनों के साथ मारपीट किए जाने की बात भी कही है।

 

पीड़ित के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने 112 पुलिस सेवा और 108 एम्बुलेंस को फोन किया। एम्बुलेंस से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलग्राम पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार हुआ। इसके बाद माधौगंज थाने में उनका और अन्य घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

 

*पीड़ित का आरोप_हमारे खिलाफ मुकदमा दर्ज,हमारी तहरीर पर कार्रवाई नहीं!*

 

दिलीप यादव ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि घटना के बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 260/2026 दर्ज कर लिया, जबकि उनकी ओर से दी गई तहरीर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष और दर्ज मुकदमे के वास्तविक तथ्य सामने आना भी जरूरी है।

 

*कप्तान साहब अशोक कुमार मीणा से सीधे सवाल*

 

*अब सवाल हरदोई पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से हैं_*

 

1. जब भूमि की सीमा को लेकर विवाद की शिकायत पहले से दी जा रही थी, तो दोनों गांवों की सीमा का निष्पक्ष निर्धारण समय रहते क्यों नहीं कराया गया?

2. यदि मौके पर तनाव की आशंका जताई गई थी, तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं?

3. क्या घटना के वीडियो, 112 कॉल, एम्बुलेंस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों की तहरीरों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?

4. यदि पीड़ित की तहरीर पर कार्रवाई नहीं हुई है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?

5. क्या चकबंदी और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाएगी?

 

कप्तान साहब! मामला केवल जमीन की नाप का नहीं, बल्कि एक शिकायतकर्ता की सुरक्षा, निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

 

दिलीप यादव ने जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने, दोनों गांवों की सीमा राजस्व टीम की मौजूदगी में निष्पक्ष रूप से चिन्हित कराने तथा उनकी तहरीर और घटना से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है।

 

अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार कार्रवाई ही पीड़ित को न्याय दिलाने तथा जमीन के विवाद को आगे बढ़ने से रोकने का रास्ता है।

*यह खबर शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त किया जाना शेष है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को जांच या न्यायिक निर्णय से पहले सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।*