नरसिंहपुर में निर्माणाधीन पुलिया पर सवाल, बिना सड़क के कैसे मिलेगा ग्रामीणों को आवागमन का लाभ?

बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मोदीपारा के आश्रित ग्राम नरसिंहपुर में निर्माणाधीन पुलिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण कार्य की उपयोगिता, स्थल चयन और गुणवत्ता को लेकर उठाए गए सवालों के बीच शिकायतों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिया के आगे सड़क ही नहीं है और वहां से निजी भूमि शुरू हो जाती है, तो इस निर्माण का ग्रामीणों को वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा? क्या पुलिया निर्माण से पहले निजी भू-स्वामी से सड़क निर्माण के लिए सहमति ली गई थी या भूमि उपलब्ध कराने की अनुमति प्राप्त की गई थी? यदि ऐसा नहीं किया गया है, तो पुलिया तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण कैसे होगा? इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले की जांच उन्हीं विभागों के अधिकारियों से कराई गई, जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत की गई थी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

मामले में मांग की जा रही है कि जांच केवल विभागीय रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। साथ ही, तकनीकी स्वीकृति, निर्माण की उपयोगिता और संबंधित अभिलेखों की भी जांच की जाए।

गेज नदी के डुबान क्षेत्र में निर्माण पर सवाल

निर्माण स्थल गेज नदी के डुबान क्षेत्र में होने की बात भी उठाई गई है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि पुलिया का निर्माण स्थल तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त है या नहीं। नदी के जलस्तर में वृद्धि और डुबान की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्माण की डिजाइन, तकनीकी मापदंडों और गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए।

इसके अलावा, निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जरूरत है कि संबंधित विभागों से अलग स्वतंत्र तकनीकी अधिकारियों की टीम गठित कर निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया जाए। साथ ही, राजस्व अभिलेखों के माध्यम से निजी भूमि की स्थिति, सड़क की उपलब्धता और भूमि संबंधी अनुमति की जांच की जाए।सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुलिया निर्माण से पहले ग्रामीणों के आवागमन के लिए सड़क की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी? क्या निर्माण स्थल का चयन तकनीकी और राजस्व नियमों के अनुरूप हुआ है? और क्या निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मापदंडों के अनुसार है? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।