यूजीसी कानून के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, बोले- काला कानून वापस ले सरकार, वरना देशभर में होगा आंदोलन

कासगंज। यूजीसी कानून के विरोध में शनिवार को जनपद न्यायालय कासगंज के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र पाल सिंह बैस के नेतृत्व में हुई बैठक में अधिवक्ताओं ने कानून को वापस लेने और देश में आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग उठाई। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र पाल सिंह बैस ने कहा कि सरकार यूजीसी कानून लागू कर देश के शैक्षणिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है और छात्रों व शिक्षकों के बीच वैमनस्य पैदा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि नए कानून में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल एससी, एसटी और ओबीसी के खिलाफ होने वाले भेदभाव तक सीमित है। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों में आशंका है कि उन्हें केवल अपराधी या भेदभाव करने वाला मान लिया गया है।

बैस ने कहा कि नए कानून में झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में कानून के दुरुपयोग की पूरी आशंका है, जिससे विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक परिसरों में अराजकता पैदा हो सकती है। उन्होंने सरकार से बिना देरी किए कानून वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के बीच सामंजस्य बना रहना चाहिए और देश में अमन-चैन कायम रहना चाहिए। उन्होंने आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू किए जाने की भी मांग की।

बार के पूर्व महासचिव चेतन चौहान ने कहा कि मौजूदा सरकार सवर्ण विरोधी है और ऐसे कानून ला रही है, जिससे सवर्णों का नुकसान हो। उन्होंने यूजीसी कानून को 100 प्रतिशत सवर्ण विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा नहीं हुआ तो देशभर में आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

बैठक को अधिवक्ता श्याम सुंदर सोलंकी, शैलेंद्र कुमार सिंह, निरंजन सिंह, कौशलेंद्र सिंह और पंकज चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया। सभी ने कानून का विरोध करते हुए इसे अविलंब वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन में सुनील असावा, आदेश कुमार सिसोदिया, अमित सोलंकी, मोहम्मद अयाज, संजय सोलंकी, मोहम्मद तारिक अली, जावेद खान, विकास सोलंकी, अरविंद कुमार, ओमेंद्र सिंह, नरेंद्र शर्मा, अभिषेक कुमार, राज, मोहित बघेल सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।