एक साल बाद भी शिवम के कातिल नही हुए बेनकाब,, दो राज्यों की पुलिस के हाथ खाली! 

31 अगस्त 2025 को कुरेचा बांदा में मिली थी 24 वर्षीय शिवम चौबे की लाश, पहले आत्महत्या-हत्या में उलझा रहा मामला, बाद में अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

जतारा।

कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन कानून की गिरफ्त में आ ही जाता है। लेकिन जतारा निवासी 24 वर्षीय शिवम चौबे की हत्या का मामला इस कहावत पर सवाल खड़े कर रहा है। घटना को एक साल बीत चुका है, इसके बावजूद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस अब तक शिवम के कातिलों तक नहीं पहुंच सकी है। परिजनों को आज भी उस दिन का इंतजार है, जब शिवम की मौत का राज खुलेगा और दोषी कानून के शिकंजे में होंगे।

30 अगस्त की शाम अचानक बंद हो गया था फोन

जानकारी के अनुसार जतारा के प्रधानपुरा निवासी शिवम चौबे 30 अगस्त 2025 को किसी काम से उत्तर प्रदेश के मऊरानीपुर गए थे। शाम करीब 7 बजे उन्होंने अपनी बाइक में पेट्रोल भी भरवाया था। इसके बाद अचानक उनका मोबाइल बंद बताने लगा।

परिजनों ने शिवम से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिलने के बाद उनकी चिंता बढ़ गई। काफी खोजबीन के बाद भी शिवम का कोई पता नहीं चला। अगले दिन 31 अगस्त 2025 को मऊरानीपुर के कुरेचा बांदा में शिवम की लाश मिलने की सूचना सामने आई तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

हत्या या आत्महत्या... लंबे समय तक उलझा रहा मामला

शिवम की मौत के बाद मामला शुरुआत में हत्या और आत्महत्या के बीच उलझा रहा। घटना को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लगातार लोगों का आक्रोश सामने आया। लोगों ने प्रदर्शन कर पुलिस से जल्द मामले का खुलासा करने की मांग की। बढ़ते दबाव के बाद मऊरानीपुर कोतवाली पुलिस ने शिवम की मौत के मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया।

लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच किसी निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंच सकी।

एक साल गुजर गया, सवाल अब भी वही?कौन हैं शिवम के कातिल?

शिवम की मौत को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन पुलिस के पास अब तक न तो हत्यारों के नाम सामने आए और न ही घटना का स्पष्ट खुलासा हो सका। मामला दो राज्यों की पुलिस के बीच जांच के दायरे में रहा, लेकिन परिवार को न्याय का इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ।

घटना के एक साल बाद भी आरोपियों का पता नहीं चलना पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर वह कौन लोग थे, जिन्होंने शिवम की जान ली? हत्या के पीछे क्या वजह थी? शिवम को किसने और क्यों निशाना बनाया? इन सवालों के जवाब अब भी अनसुलझे हैं।

इकलौता बेटा था शिवम, परिवार में छाया मातम

शिवम अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। जिस बेटे के सहारे माता-पिता ने भविष्य के सपने संजोए थे, उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में पहुंचा दिया।

एक साल बाद भी परिजनों के लिए शिवम की मौत महज एक पुरानी घटना नहीं, बल्कि ऐसा जख्म है जो हर दिन ताजा होता है। परिवार और क्षेत्र के लोगों की अब एक ही मांग है?शिवम के कातिलों का जल्द पता लगाया जाए और उन्हें कड़ी सजा दिलाई जाए।

एक साल बाद भी न्याय का इंतजार

शिवम की हत्या का मामला अब पुलिस के लिए भी चुनौती बन चुका है। लोगों का कहना है कि यदि जांच एजेंसियां गंभीरता से पड़ताल करें तो घटना से जुड़े सुरागों को जोड़कर आरोपियों तक पहुंचा जा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिवम चौबे की पहली बरसी तक भी उसके कातिल पुलिस की पकड़ से बाहर रहेंगे, या फिर एक साल बाद जांच को कोई नई दिशा मिलेगी? परिवार और क्षेत्रवासियों की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।