ठंडी हवाओं के बीच मां वैष्णो देवी के दरबार में आस्था का सैलाब, मौसम ने दी राहत

ठंडी हवाओं के बीच मां वैष्णो देवी के दरबार में आस्था का सैलाब, मौसम ने दी राहत

रक्षाबंधन के चलते यात्रा में अपेक्षाकृत कमी, शाम पांच बजे तक करीब 8500 श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

कटड़ा। ठंडी हवाओं और बदलते मौसम के बीच मां वैष्णो देवी की यात्रा वीरवार को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ सुचारु रूप से जारी रही। मौसम के उतार-चढ़ाव के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और जयकारों के साथ भक्त माता के भवन की ओर बढ़ते नजर आए।

दिन की शुरुआत में तेज धूप और उमस के कारण श्रद्धालुओं को गर्मी का सामना करना पड़ा, लेकिन त्रिकूट पर्वत पर छाए बादलों और चलती ठंडी हवाओं ने कुछ ही समय में मौसम को सुहावना बना दिया। तड़के हुई हल्की बारिश ने भी श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से राहत पहुंचाई। बारिश थमने के बाद यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही फिर तेज हो गई।

मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित

बदलते मौसम का असर हेलीकॉप्टर सेवा पर जरूर पड़ा। दिन के अधिकांश समय सेवा प्रभावित रही। मौसम में सुधार होते ही सेवा बहाल करने के प्रयास किए जाते रहे। वहीं, पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भवन की ओर बढ़ते रहे।

सुरक्षा व्यवस्था रही मजबूत

श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए यात्रा मार्गों पर आपदा प्रबंधन दल, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड प्रशासन, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान लगातार तैनात रहे। सभी सुरक्षा दलों ने मौसम की स्थिति और यात्रा व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए रखी, जिससे यात्रा सुचारु बनी रही।

सभी यात्रा मार्ग खुले, सुविधाएं उपलब्ध

मां वैष्णो देवी के सभी प्रमुख यात्रा मार्ग सुचारु रहे। श्रद्धालुओं को बैटरी कार, घोड़ा-पिट्ठू और पालकी सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध रहीं। मौसम के बदलाव के बीच भी श्रद्धालुओं ने संयम और उत्साह के साथ अपनी यात्रा पूरी की।

रक्षाबंधन के चलते कम हुई भीड़

रक्षाबंधन पर्व के चलते इस समय यात्रा में अपेक्षाकृत कमी देखी जा रही है। वीरवार शाम पांच बजे तक करीब 8500 श्रद्धालु पंजीकरण करवाकर भवन की ओर रवाना हो चुके थे, जबकि श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा। कम भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को यात्रा मार्गों पर अपेक्षाकृत बेहतर सुविधा और सहज वातावरण भी मिला।

मौसम के बदलते मिजाज के बावजूद मां वैष्णो देवी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह कायम रहा। ठंडी हवाओं और बादलों के बीच माता के जयकारों से त्रिकूट पर्वत का वातावरण भक्तिमय बना रहा।