खेतों में अत्यधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग दे रहा कैंसर को न्योता: कृषि वैज्ञानिक डॉ विनय।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।खेतों में आज देश भर के किसान यूरिया देने के लिए खाद दुकानों पर लंबी लंबी कतार लगाए खड़े दिख रहे हैं।बाबजूद इसके कई किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।जिससे किसानों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।यूरिया नहीं मिलने से कहीं सरकार तो कहीं खाद दुकानदारों पर किसान द्वारा आरोप प्रत्यारोप लगाया जा रहा है।इसी बीच किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि वैज्ञानिक डॉ विनय कुमार ने बताया कि किसान अपने फसल में यूरिया खाद देने के लिए बेचैन हैं।परन्तु इसके आगामी दुष्प्रभाव से अनभिज्ञ हैं।अत्यधिक यूरिया इंसानों में कैंसर को जन्म दे रहा है।पहले के जमाने में 10 से 20 गांव में कहीं एक लोगो में कैंसर का शिकायत देखने या फिर सुनने को मिलता था।परंतु आज के परिवेश में लगभग हर गांव में एक या दो मरीज कैंसर के मिल रहे हैं।इसका सबसे बड़ा कारण अत्यधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग है।कृषि वैज्ञानिक डॉ विनय ने आगे बताया कि मौसम के अनुसार अभी गन्ना और धान दोनों में उर्वरक की अति आवश्यकता है।किसान थोड़ी सी सूझ बूझ दिखाए तो उपज सही हो सकता है।अत्यधिक मात्रा में उर्वरक के उपयोग से धान और गन्ना में बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है।किसान भाइयों को सलाह दिया जाता है कि यूरिया का उपयोग सीमित मात्रा में एवं संतुलित उर्वरक का उपयोग करें।फसलों के माध्यम से प्रति व्यक्ति 1 से 5 किलो ग्राम यूरिया भोजन के माध्यम से शरीर में जा रहा है।जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी को जन्म दे रहा है।जिंक,कैल्सियम,सल्फर,मैग्नीशियम इत्यादि का उपयोग किसानों द्वारा कम करने के कारण उपज में कमी आती है।जिससे हमारे थाली में सूक्ष्म पोषक तत्व गायब हो गया है।जहरीली दबा का उपयोग से शरीर में विभिन्न बीमारियों का समावेश हो रहा है। किसान भाई केवल यूरिया और उर्वरक की ओर ध्यान आकृष्ट करने के बजाए मिट्टी की जांच करवा कर जरूरत के हिसाब से खाद का उपयोग करें।अन्यथा भविष्य में खेत बंजर हो जाएगा।जिसका सीधा असर फसल पर पड़ेगा और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न ही सकती है।कृषि वैज्ञानिक डॉ विनय ने किसान भाईयों से विशेष आग्रह किया है कि फसल और मिट्टी के बचाव हेतु सूक्ष्म जीवाणु और सूक्ष्म तत्वों का उपयोग अधिक से अधिक करें। जैविक जीवन जिये।