बदायूं में सेसन कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉंग्रेस राहुल गांधी,डॉक्टर उदितराज के विरुद्ध मुकदमा किया खारिज।

बदायूं में सेसन कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉंग्रेस राहुल गांधी,डॉक्टर उदितराज के विरुद्ध मुकदमा किया खारिज।
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बदायूं।
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और डॉ0 उदित राज के खिलाफ बदायूं में जय सिंह सागर एडवोकेट ने एक याचिका न्यायालय में प्रस्तुत कर आरोप लगाए की डॉक्टर उदित राज ने बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि न्यायालय को सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है तथा कोई संज्ञेय अपराध होना प्रतीत नहीं होता है।इसके बाद जय सिंह सागर ने सेशन कोर्ट में उसे आदेश के विरुद्ध निगरानी प्रस्तुत की सत्र न्यायाधीश ने निगरानी को निस्तारण हेतु अपर जिला जज पॉक्सो कोर्ट प्रथम को स्थानांतरित कर दिया जिस पर न्यायालय ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और डॉक्टर उदित राज को नोटिस जारी किया नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत मिश्रा एडवोकेट एवं डॉ0 उदित राज की ओर से प्रांशु अग्रवाल न्यायालय में उपस्थित हुए और अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठता अधिवक्ता हेमंत मिश्रा डॉ उदित राज की ओर से प्रांशु अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष जोरदार बहस की राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हेमन्त मिश्रा ने न्यायालय में कहा कि कांग्रेस के बड़े नेता लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कांग्रेस राहुल गांधी को इस मुकदमे में झूठे तथ्यों पर आरोपी बनाया गया है इस संबंध में कोई भी साक्षी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया केवल सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के उद्देश्य से राहुल गांधी को आरोपी बनाने का प्रयास किया गया कांग्रेस पार्टी सदैव सभी नेताओं का सम्मान करने वाली है राहुल गांधी ने कभी भी किसी का अपमान नहीं किया है निगरानीकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में ना तो यह उल्लेखित किया है कि राहुल गांधी के बयान या डॉक्टर उदित राज के बयान को कहां सुना कहां देखा किस प्रकार अवर न्यायालय द्वारा पारित आदेश पूर्णतया सही है न्यायालय के आदेश में कोई विधिक त्रुटि नही है न्यायालय को उपरोक्त मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं था और मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा पारित आदेश में कोई अनियमितता नहीं है लिहाजा निगरानी निरस्त किए जाने योग्य है। निगरानीकर्ता की ओर से संदीप मिश्रा एडवोकेट ने तर्क प्रस्तुत किया उदित राज की ओर से प्रांशु अग्रवाल ने तर्क प्रस्तुत किया अपर जिला जज सुश्री अनीता प्रथम ने दोनों पक्षों की सुनवाई को उपरांत फैसला सुरक्षित रख लिया न्यायालय ने अपने फैसला सुनाते हुए कहा कि विद्वान मजिस्ट्रेट ने जो आदेश पारित किया था वह सही था आदेश में कोई त्रुटि या अनियमितता नही थी निगरानीकर्ता की निगरानी में कोई बल नहीं है लिहाज निगरानी निरस्त की जाती है कोर्ट में सुनवाई के समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष आसिफ जमा रिजवी विधि विभाग बदायूं के प्रदेश सचिव दीपक मिश्रा जिला अध्यक्ष सूरजपाल सिंह सोलंकी सुधीर कुमार मिश्रा मुनेंद्र कनौजिया गोपाल पांडे ज़कीर खां उपस्थित रहे। न्यायालय के आदेश पर राहुल गांधी के अधिवक्ता हेमंत मिश्रा ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा-माननीय न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों एवं विधिक प्रावधानों के आधार पर रिवीजन याचिका को खारिज कर यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय केवल साक्ष्यों और कानून के आधार पर निर्णय देता है। यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता तथा विधि के शासन में जनता के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करता है। हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं और इसे सत्य एवं न्याय की जीत मानते हैं।उन्होंने आगे कहा लोकतंत्र में न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्च संरक्षक है। हमें पूर्ण विश्वास है कि न्यायालयों से प्रत्येक पक्ष को निष्पक्ष न्याय मिलेगा। यह निर्णय निराधार एवं विधि-विरुद्ध प्रयासों पर न्यायिक व्यवस्था की स्पष्ट मुहर है।