74 साल पुरानी रेल धरोहर ZB-66 की घर वापसी, कांगड़ा घाटी में फिर दौड़ेगा भाप इंजन

कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक धरोहर 'स्टीम लोको ZB-66' को मिला नया जीवन, फिर गूंजेगी भाप इंजन की सीटी

पठानकोट। भारतीय रेल की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक कांगड़ा घाटी रेलवे का ऐतिहासिक स्टीम इंजन ZB-66 एक बार फिर अपनी भाप और सीटी की मधुर ध्वनि के साथ पर्यटकों एवं रेल प्रेमियों को रोमांचित करने के लिए तैयार है। उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने इस विरासत इंजन को नया जीवन देते हुए 8 जून 2026 को रेवाड़ी हेरिटेज शेड से पुनः पठानकोट पहुंचाया है, जहां आवश्यक रखरखाव के बाद इसे कांगड़ा घाटी रेलवे के सुरम्य नैरो गेज ट्रैक पर दोबारा संचालित किया जाएगा।

यह ऐतिहासिक इंजन न केवल भारतीय रेल की तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की विश्वप्रसिद्ध कांगड़ा घाटी रेलवे की पहचान भी माना जाता है। इसकी वापसी से क्षेत्र में विरासत पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

74 वर्ष पुरानी विरासत का गौरव

वर्ष 1952 में यूनाइटेड किंगडम के स्टाफोर्ड स्थित प्रतिष्ठित कंपनी डब्ल्यू.जी. बैगनॉल लिमिटेड द्वारा निर्मित ZB-66 ने दशकों तक भारतीय रेल की सेवा की। 2-6-2T व्हील व्यवस्था वाला यह शक्तिशाली स्टीम इंजन अपने समय में नैरो गेज रेल परिचालन का प्रमुख आधार रहा।

हालांकि समय के प्रभाव और लगातार उपयोग के कारण वर्ष 2012 तक इसके बॉयलर, टेंडर, अंडरफ्रेम और चालक केबिन को गंभीर क्षति पहुंच चुकी थी। ऐसे में इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी अमृतसर वर्कशॉप ने उठाई। विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीशियनों की वर्षों की मेहनत और तकनीकी कौशल के परिणामस्वरूप मार्च 2017 में इस इंजन का सफल पुनर्निर्माण किया गया और इसे नया जीवन मिला।

यादगार यात्राओं का साक्षी रहा ZB-66

पुनर्जीवित होने के बाद इस स्टीम इंजन ने कई ऐतिहासिक और विशेष यात्राओं का संचालन किया। नवंबर 2018 में ब्रिटेन से आए पर्यटकों के लिए पालमपुर से बैजनाथ पपरोला तक विशेष चार्टर्ड स्टीम ट्रेन चलाई गई, जिसे यात्रियों ने अत्यंत सराहा।

इसके अलावा वर्ष 2019 में स्कूली बच्चों को भारतीय रेल की विरासत और स्टीम तकनीक से परिचित कराने के उद्देश्य से जनवरी और फरवरी माह में विशेष स्टीम ट्रेन सेवाएं संचालित की गईं। इन यात्राओं ने नई पीढ़ी को रेल इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकनीकी दृष्टि से भी बेहद खास

ZB-66 की तकनीकी विशेषताएं इसे कांगड़ा घाटी रेलवे के सबसे आकर्षक इंजनों में शामिल करती हैं। लगभग 43 टन वजनी यह इंजन 8000 पाउंड की ट्रैक्शन क्षमता रखता है। इसमें 3.5 टन कोयला और 3000 लीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता है। वैक्यूम ब्रेक प्रणाली से सुसज्जित यह इंजन अधिकतम 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से संचालित हो सकता है।

विरासत संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर रेलवे का मानना है कि ऐतिहासिक स्टीम इंजन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक और तकनीकी विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। ZB-66 की वापसी से कांगड़ा घाटी रेलवे में हेरिटेज टूरिज्म को नया आयाम मिलेगा तथा देश-विदेश के पर्यटक भाप इंजन युग के रोमांच का अनुभव कर सकेंगे।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस इंजन का संचालन न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास, तकनीकी विकास और विरासत संरक्षण के महत्व से भी अवगत कराएगा।

कांगड़ा घाटी की वादियों में जल्द ही जब ZB-66 की सीटी गूंजेगी, तो वह केवल एक ट्रेन की आवाज नहीं होगी, बल्कि भारतीय रेल की अमर विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक होगी।