Big News:यूपी पूर्वांचल के बाहुबलियों का ‘चैनपुर परीक्षण’ सफल,सीमा पार दखल से एनडीए प्रत्याशी को मिली निर्णायक बढ़त जौनपुर, मिर्जापुर और चंदौली के प्रभावशाली नेताओं की संयुक्त कोशिशों से चैनपु

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चंदौली/चैनपुर। बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यूपी-बिहार की सीमा से सटे क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों पर पूर्वांचल के नेताओं का प्रभाव निर्णायक भूमिका निभाता है।बिहार के चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार उत्तर प्रदेश के कई प्रभावशाली नेताओं की सक्रियता पूरे चुनावी अभियान के दौरान चर्चा का विषय बनी रही।

सूत्र बताते हैं कि प्रचार के चरम पर जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, मिर्जापुर के एमएलसी विनीत सिंह और चंदौली के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने कई दौर की सभाएँ और जनसंपर्क किए।इन नेताओं ने एनडीए उम्मीदवार जमां खान के समर्थन में लगातार अपील की और सीमावर्ती इलाकों में मतदाताओं के बीच प्रभाव बनाने की कोशिश की।चैनपुर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल का सामाजिक और भौगोलिक असर हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है,जिसका लाभ इस बार भी देखने को मिला।चुनाव अभियान के दौरान संयुक्त रूप से की गई सभाएँ, रैलियाँ और रात्रि जनसंपर्क ने स्थानीय वोटों को एकमुश्त प्रभावित किया।हालाँकि, मतदान के बाद अंतिम दिन तक परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी रही और राजनीतिक गलियारों में चैनपुर सीट को लेकर असमंजस की स्थिति कायम रही।चिरागों की दिशा बदलने वाले कई कारकों के बीच पूर्वांचल के नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई थी, क्योंकि उन्होंने इस सीट को अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति और सक्रियता का मुद्दा बना लिया था।गिनती के शुरुआती रुझानों में स्थिति उलझी हुई दिखाई दी, लेकिन अंतिम चरण में वोटों की निर्णायक बढ़त एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में जाती दिखी।जमां खान की बढ़त ने न केवल समर्थकों को राहत दी, बल्कि यूपी के उन नेताओं को भी राजनीतिक सुकून मिला, जिन्होंने अपने प्रभाव क्षेत्र से इतर इस चुनाव में समय और ऊर्जा लगाई थी।

चैनपुर का यह परिणाम यूपी-बिहार सीमा की राजनीति में एक दिलचस्प उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ बाहरी राज्यों के प्रभावशाली चेहरों की मौजूदगी ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दिया।चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में भी ऐसे संयुक्त समीकरणों की भूमिका और बढ़ सकती है, क्योंकि सीमावर्ती इलाकों में मतदाता सामाजिक संरचना से अधिक परिचित चेहरों और प्रभावशाली व्यक्तियों की अपील को महत्व देते हैं।चैनपुर की यह जीत न केवल एनडीए के लिए महत्वपूर्ण रही, बल्कि पूर्वांचल के उन नेताओं के लिए भी, जिन्होंने इस चुनाव को अपनी राजनीतिक सक्रियता का एक नया विस्तार माना था।