* " पेमा सोरिक तिब्बती मेडिकल सेंटर " तिब्बती चिकित्सा पद्धति *

द्वारका सेक्टर 19 में खुला नया तिब्बती क्लिनिक, पारंपरिक 'सोवा रिगपा' चिकित्सा प्रणाली से होगा मरीजों का इलाज

नई दिल्ली (द्वारका): राजधानी दिल्ली के द्वारका सेक्टर 19 में पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा प्रेमियों के लिए एक नई शुरुआत हुई है। यहाँ हाल ही में 'पेमा सोरिक तिब्बती मेडिकल सेंटर' (Pema Sorig Tibetan Medical Center) का उद्घाटन किया गया है। यह क्लिनिक प्राचीन तिब्बती चिकित्सा पद्धति, जिसे सोवा रिगपा (Sowa Rigpa) या सोरिकपा के नाम से जाना जाता है, पर आधारित है।

क्या है सोवा रिगपा (सोरिकपा) प्रणाली?

सोवा रिगपा दुनिया की सबसे पुरानी और प्रामाणिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जो तिब्बती संस्कृति और दर्शन का अभिन्न हिस्सा है। भारत सरकार द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है। इस पद्धति में मुख्य रूप से नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis), मूत्र परीक्षा और शरीर के संतुलन (वात, पित्त, कफ / Lung, Tripa, Beken) का विश्लेषण करके बीमारी की जड़ का इलाज किया जाता है।

क्लिनिक की प्रमुख विशेषताएं और सेवाएं

'पेमा सोरिक तिब्बती मेडिकल सेंटर' में मरीजों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:

  1. विशेषज्ञ परामर्श: अनुभवी तिब्बती डॉक्टरों (आमची/Amchi) द्वारा नाड़ी देखकर रोगों का सटीक निदान।
  2. प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से निर्मित दवाएं: हिमालयी जड़ी-बूटियों और खनिजों से बनी पारंपरिक तिब्बती औषधियों द्वारा उपचार।
  3. गंभीर बीमारियों का हर्बल उपचार: जोड़ों का दर्द (अर्थराइटिस), माइग्रेन, पाचन संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग, अनिद्रा, तनाव, और क्रोनिक (पुरानी) बीमारियों के लिए विशेष देखभाल।
  4. पंचकर्म एवं थेरेपी: सोवा रिगपा से जुड़ी पारंपरिक थेरेपी और परामर्श, जो शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करती हैं।

स्थानीय निवासियों के लिए राहत

द्वारका और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह केंद्र एक बेहतरीन विकल्प साबित होगा। एलोपैथी के साथ-साथ प्राकृतिक और बिना किसी दुष्परिणाम (Side Effects) वाली चिकित्सा चाहने वाले लोगों के लिए अब दूर जाने की जरूरत नहीं होगी।

स्थानीय लोगों ने इस नए तिब्बती मेडिकल सेंटर का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया और प्रभावी माध्यम मिलेगा।