मानसून में सुरक्षित रेल संचालन के लिए मध्य रेल की नई पहल, घाट खंडों में वेटिवर घास से मजबूत होंगे ढलान

मुंबई। मानसून के दौरान घाट खंडों में मृदा अपरदन, भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए मध्य रेल ने पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ तकनीक अपनाई है। रेलवे ने वेटिवर घास आधारित जैव-अभियांत्रिकी के जरिए संवेदनशील ढलानों और तटबंधों को प्राकृतिक रूप से मजबूत करने की पहल शुरू की है।

मध्य रेल के भोर घाट (कर्जत-लोनावला) और थाल घाट (कसारा-इगतपुरी) जैसे क्षेत्रों में मानसून के दौरान तेज बारिश से मिट्टी का कटाव, सतही जल बहाव और उथले भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। ऐसे में ढलानों की मजबूती सीधे तौर पर रेल परिचालन की सुरक्षा से जुड़ी है।

5,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट

मध्य रेल ने दक्षिण-पूर्व घाट खंड में पायलट आधार पर कुल 5,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में वेटिवर घास का रोपण किया है। इसके तहत?

खंडाला-मंकी हिल खंड, अप लाइन की ओर किमी 122/0-122/15 के पास 1,050 वर्ग मीटर क्षेत्र में रोपण किया गया है।

ठाकुरवाड़ी केबिन-पालसधरी खंड, मिड लाइन की ओर किमी 106/600-700 के बीच 4,250 वर्ग मीटर क्षेत्र में वेटिवर घास लगाई गई है।

मिट्टी को प्राकृतिक रूप से मजबूती देगी घास

वेटिवर घास की जड़ें नीचे की ओर तेजी से बढ़कर मजबूत और घना जड़-जाल तैयार करती हैं। रेलवे के अनुसार 12 से 24 महीनों में इसकी जड़ें करीब 3 से 4 मीटर तक गहरी हो सकती हैं। यह जड़-जाल मिट्टी को बांधकर ढलानों को स्थिर करने में मदद करता है और मिट्टी के खिसकने की संभावना कम करता है।

ढलानों पर वेटिवर घास की कतारें समोच्च के अनुरूप लगाई जा रही हैं। इसकी घनी पत्तियां बारिश के पानी के बहाव की गति को कम करती हैं, जिससे मिट्टी का कटाव और गहरी नालियां बनने की समस्या नियंत्रित होती है। साथ ही मिट्टी में पानी के समावेशन और गाद को रोकने में भी मदद मिलती है।

सुरक्षित रेल परिचालन के साथ पर्यावरण संरक्षण

मध्य रेल की इस प्रकृति आधारित पहल से मानसून के दौरान घाट खंडों में मृदा अपरदन और ढलानों की अस्थिरता को नियंत्रित करने, पटरियों पर चट्टानों और मलबे के गिरने की घटनाओं को कम करने तथा रेल परिचालन को सुरक्षित और समयबद्ध बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पारंपरिक ढलान सुरक्षा उपायों के रखरखाव पर आने वाली लागत को भी कम किया जा सकेगा।

मध्य रेल का कहना है कि पारंपरिक अभियांत्रिकी उपायों के साथ वेटिवर जैव-अभियांत्रिकी जैसे प्रकृति आधारित समाधान अपनाकर घाट खंडों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा रहा है। इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. स्वप्निल निला, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल ने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना रेलवे की प्राथमिकता है। पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाकर हर मौसम में सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।