मध्य रेलवे के भुसावल मंडल की बड़ी उपलब्धि, रेलवे संपत्तियों से 12.33 लाख रुपये का सालाना राजस्व

भुसावल। मध्य रेलवे के भुसावल मंडल ने रेलवे की खाली और अनुपयोगी संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर गैर-किराया राजस्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मंडल ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों और प्रतिष्ठानों पर 10 वाणिज्यिक अनुबंध किए हैं। इनसे लगभग 12.33 लाख रुपये का वार्षिक लाइसेंस शुल्क प्राप्त होगा, जबकि अनुबंधों की कुल अवधि में लगभग 64.06 लाख रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।

रेलवे प्रशासन ने विज्ञापन बोर्ड, किराना दुकान, चिकित्सा स्टोर, कैंटीन और दोपहिया वाहन पार्किंग जैसी सुविधाओं के लिए प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अनुबंध आवंटित किए हैं। कई स्थानों पर लाइसेंस शुल्क निर्धारित आरक्षित मूल्य से काफी अधिक मिला है। इससे रेलवे की संपत्तियों का बेहतर उपयोग होने के साथ यात्रियों और रेल कर्मचारियों को भी सुविधाएं मिलेंगी।

नेपानगर स्टेशन पर पहली बार लागू हुआ नया मॉडल

भुसावल मंडल की प्रमुख उपलब्धियों में नेपानगर स्टेशन पर पहली बार सभी संपत्तियों को एक समूह में शामिल कर अनुबंध देना शामिल है। 25 सितंबर 2026 को पांच वर्ष के लिए आवंटित इस अनुबंध से सालाना 2.21 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क मिलेगा, जबकि इसका आरक्षित मूल्य केवल 50 हजार रुपये था। इस प्रकार आरक्षित मूल्य से 342 प्रतिशत अधिक शुल्क प्राप्त हुआ।

इस अनुबंध में विज्ञापन बोर्ड, बिना वातानुकूलन वाला निःशुल्क प्रतीक्षालय, पैड सामग्री बिक्री कियोस्क, किराना कियोस्क और दोपहिया वाहन पार्किंग शामिल हैं। इस पहल से ऐसे स्टेशन पर भी गैर-किराया राजस्व का नया स्रोत तैयार हुआ, जहां पहले इस मद में कोई आय नहीं होती थी।

विज्ञापन और किराना दुकानों से बढ़ेगी आय

8 अक्टूबर को लासलगांव और निफाड़ स्टेशनों पर विज्ञापन बोर्ड के अनुबंध आवंटित किए गए। लासलगांव में सालाना 40 हजार रुपये और निफाड़ में 81 हजार रुपये का लाइसेंस शुल्क तय हुआ। इन अनुबंधों की तीन वर्ष की कुल कीमत क्रमशः 1.20 लाख और 2.43 लाख रुपये है। निफाड़ में प्राप्त शुल्क आरक्षित मूल्य से 136 प्रतिशत अधिक रहा।

9 अक्टूबर को बुरहानपुर और खंडवा स्टेशनों पर किराना कियोस्क के अनुबंध भी दिए गए। बुरहानपुर में सालाना 50,500 रुपये और खंडवा में 1.61 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क तय किया गया। पांच वर्ष की अवधि में इन अनुबंधों से क्रमशः लगभग 2.68 लाख और 8.54 लाख रुपये का राजस्व मिलेगा। इससे यात्रियों को आवश्यक सामान उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

रेल कर्मचारियों को मिलेंगी बेहतर कैंटीन सुविधाएं

6 अक्टूबर को इलेक्ट्रिक लोको शेड और कोचिंग यार्ड में कैंटीन सुविधाओं के अनुबंध किए गए। इलेक्ट्रिक लोको शेड में सालाना 2.88 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क तय हुआ, जो 50 हजार रुपये के आरक्षित मूल्य से 476 प्रतिशत अधिक है। वहीं कोचिंग यार्ड में सालाना 1.31 लाख रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया, जो आरक्षित मूल्य से 163 प्रतिशत अधिक है। इन दोनों अनुबंधों की पांच वर्ष की कुल कीमत लगभग 15.29 लाख और 7.01 लाख रुपये है।

तीन स्टेशनों पर खुलेंगी चिकित्सा दुकानें

22 सितंबर को भुसावल, बडनेरा और चालीसगांव स्टेशनों पर चिकित्सा दुकानों के अनुबंध आवंटित किए गए। भुसावल में सालाना 1.90 लाख रुपये, बडनेरा में 51,021 रुपये और चालीसगांव में 38,999 रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया। इन अनुबंधों से पांच वर्ष में क्रमशः लगभग 10.14 लाख, 2.70 लाख और 2.07 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इन दुकानों से यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा उत्पाद उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

पारदर्शी बोली से रेलवे की आय बढ़ाने पर जोर

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला के अनुसार, भुसावल मंडल रेलवे संपत्तियों की व्यावसायिक क्षमता का अधिकतम उपयोग करने और गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पारदर्शी बोली प्रक्रिया और नए व्यावसायिक मॉडल के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।

रेलवे की इस पहल से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि यात्रियों को आवश्यक वस्तुएं और सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ रेल कर्मचारियों के लिए भी बेहतर व्यवस्थाएं विकसित होंगी।