बंदी सिंह रिहाई मोर्चे को दिल्ली लाने की उठी मांग

बंदी सिंह रिहाई मोर्चे को दिल्ली लाने की उठी मांग

👉 कालका द्वारा सहयोग का भरोसा स्वागतयोग्य, गुरुद्वारा बंगला साहिब में मोर्चा लगने से केंद्र पर बढ़ेगा दबाव: भाई रतिंदर सिंह इंदौर

👉 राजधानी से बंदी सिंहों की आवाज सीधे केंद्र सरकार और देश के नीति-निर्धारकों तक पहुंचेगी

नई दिल्ली, 10 सितंबर (मनप्रीत सिंह खालसा): बंदी सिंहों की रिहाई के लिए मोहाली में चल रहे संघर्ष को देश की राजधानी दिल्ली तक लाने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका द्वारा मोहाली के बंदी सिंह रिहाई मोर्चे को सहयोग देने के भरोसे का स्वागत करते हुए सिख चिंतक भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने कहा है कि अब समय केवल सहयोग के भरोसे का नहीं, बल्कि उसे अमली रूप देने का है। भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने कहा कि यदि बंदी सिंह रिहाई मोर्चे को दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में लाया जाता है तो इसका प्रभाव केवल मोहाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की राजधानी से बंदी सिंहों की आवाज सीधे केंद्र सरकार और देश के नीति-निर्धारकों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि बंगला साहिब में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से लगाया जाने वाला मोर्चा इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में सिख संगत और अन्य लोग नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं। यदि इसी स्थान पर बंदी सिंहों की रिहाई के लिए मोर्चा चल रहा हो तो पंजाब और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली संगत इस संघर्ष से सीधे तौर पर जुड़ सकती है। भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने कहा कि दिल्ली में मोर्चा लगने का एक और बड़ा प्रभाव यह होगा कि हिंदी और अंग्रेजी के अलावा देश की विभिन्न भाषाओं का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर कवर कर सकता है। उन्होंने कहा कि राजधानी में होने वाली हर बड़ी गतिविधि की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहुंच होती है, जिसके कारण बंदी सिंहों का मुद्दा केवल पंजाब या सिख समुदाय तक सीमित न रहकर मानवाधिकारों और न्याय के सवाल के रूप में बड़े स्तर पर सामने आ सकता है। उन्होंने कहा कि बंगला साहिब में पहुंचने वाली सिख संगत में पंजाब की संगत के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आने वाले सिख भी शामिल होते हैं। इस प्रकार मोर्चे को व्यापक संगती समर्थन मिलने के साथ-साथ मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों का ध्यान भी इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा सकता है। भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने कहा कि बंदी सिंहों का मुद्दा किसी एक परिवार, संगठन या क्षेत्र का मुद्दा नहीं है। यह लंबे समय से जेलों में बंद उन व्यक्तियों से जुड़ा सवाल है, जिनकी रिहाई को लेकर सिख समाज में लंबे समय से गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को भावनाओं के साथ-साथ कानूनी, संवैधानिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी लगातार उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से अपील की कि वह अपने द्वारा दिए गए सहयोग के भरोसे को अमली रूप देते हुए बंदी सिंह रिहाई मोर्चे को गुरुद्वारा बंगला साहिब में लाने के लिए पहल करें। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली की सिख संस्थागत नेतृत्व, संगत, मानवाधिकार संस्थाएं और अन्य जिम्मेदार पक्ष एकजुट होकर शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से इस मुद्दे को उठाते हैं तो बंदी सिंहों की रिहाई की आवाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत किया जा सकता है। अंत में भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने कहा कि मोहाली से उठी बंदी सिंहों की आवाज यदि दिल्ली के बंगला साहिब तक पहुंचती है तो इसका अगला चरण देश की राजधानी से इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना हो सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दिल्ली कमेटी इस अवसर को केवल बयान या राजनीतिक भरोसे तक सीमित न रखते हुए मोर्चे को मजबूत करने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाएगी।