पेंशन नहीं तो चैन नहीं: यूपी में वरिष्ठ पत्रकारों का आर-पार की जंग का ऐलान

*पेंशन नहीं तो चैन नहीं: यूपी में वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान*

*दीपावली तक का अल्टीमेटम: मांग न पूरी होने पर आमरण अनशन और अधिकारियों के घेराव की चेतावनी*

*10-12 भाजपा शासित राज्यों में लागू है योजना, फिर उत्तर प्रदेश में देरी क्यों?*

*बटोगे तो ठगे जाते रहोगे" ? संयोजकों ने प्रदेश भर के पत्रकारों से एकजुट होने का किया आह्वान*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों की लंबे समय से लंबित पेंशन की मांग को लेकर अब पत्रकार संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने शासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए 10 नवंबर (दीपावली) तक का समय दिया है।

समिति का साफ कहना है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर योगी सरकार ने वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजना की घोषणा नहीं की, तो पत्रकार समाज शांत नहीं बैठेगा। इसके विरोध में वरिष्ठ पत्रकारों के साथ मजबूरी में आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।

*बटोगे तो ठगे जाते रहोगे' ? एकजुटता का संदेश*

पत्रकार साथियों को संबोधित करते हुए प्रभात त्रिपाठी ने कहा, "वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन पेंशन का मुद्दा प्रदेश के हर पत्रकार के सम्मान और भविष्य से जुड़ा है। यह किसी व्यक्ति विशेष की लड़ाई नहीं, बल्कि उन सभी वरिष्ठ पत्रकारों का हक है जो जीवन के इस पड़ाव पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह नारा दिया गया है 'बटोगे तो कटोगे', उसी तर्ज पर पत्रकारों को भी यह समझना होगा कि 'बटोगे तो ठगे जाते रहोगे'। यदि इस समय सभी पत्रकार साथी एकजुट नहीं हुए, तो यह महत्वपूर्ण मुद्दा फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

*कौन है शासन में बैठा 'विभीषण'?*

उठ रहे गंभीर सवाल उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने तीखा सवाल उठाया है कि जब देश के लगभग 10 से 12 भाजपा शासित राज्यों में वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानजनक पेंशन कई वर्षों से मिल रही है, तो उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह फाइल आखिर क्यों अटकी हुई है?

*अधिकारियों की अड़ंगेबाज़ी:*

आरोप है कि सरोजनीनगर से लोकप्रिय विधायक श्री राजेश्वर सिंह जी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कई बार पत्र लिखे हैं। इसके बावजूद शासन में बैठे कुछ उच्च अधिकारी और राजनीतिक सलाहकार इस फाइल को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं।

*घेराव की चेतावनी:*

प्रभात त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मुद्दे को रोकने वाले अधिकारियों और सलाहकारों का सीधे घेराव किया जाएगा। आमरण अनशन से ठीक पहले इस घेराव की रणनीति तैयार की जा रही है।

*दो वर्षों के संघर्ष को ताकत देने की अपील*

पुनर्गठित समिति पिछले दो वर्षों से लगातार शासन स्तर पर वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन के लिए प्रयासरत है। अब जब मामला निर्णायक मोड़ पर है, तब प्रदेश भर के पत्रकारों से आपसी गुटबाज़ी भूलकर इस लड़ाई में अपनी ताकत जोड़ने की अपील की गई है।

"एकता की कड़ी में असीम शक्ति होती है। इस बार अधिकारियों और सरकार को पत्रकारों के वाजिब हक के आगे झुकना ही होगा।" ? प्रभात त्रिपाठी, संयोजक