पितृ विसर्जन पर गोमती तट से गूंजा राष्ट्रभक्ति का शंखनाद, ‘शहीद पितृ श्रद्धा नमन’ में अमर बलिदानियों को सामूहिक तर्पण

स्वाधीनता संग्राम से राष्ट्ररक्षा तक बलिदान देने वाले ज्ञात-अज्ञात क्रांतिवीरों को श्रद्धार्पण; वक्ताओं ने कहा?शहीदों का सम्मान राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक

लखनऊ। पितृ विसर्जन के पावन अवसर पर गोमती तट स्थित शहीद स्मारक पर राष्ट्रभक्ति, श्रद्धा और कृतज्ञता का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। ?शहीद पितृ श्रद्धा नमन? अनुष्ठान के माध्यम से स्वाधीनता संग्राम, विभाजन विभीषिका और राष्ट्ररक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले देश के ज्ञात-अज्ञात असंख्य क्रांतिवीरों को सामूहिक तर्पण एवं श्रद्धार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आयोजन का उद्देश्य उन वीर सपूतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना रहा, जिनके त्याग, संघर्ष और बलिदान से देश की स्वतंत्रता, सुरक्षा और गौरव की गाथा लिखी गई।�पितृ विसर्जन के दिन शहीद पितरों के स्मरण और तर्पण के इस आयोजन ने राष्ट्र के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का विशेष संदेश दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का बलिदान केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा है। राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन वीरों को स्मरण करना आने वाली पीढ़ियों को देश के इतिहास, स्वतंत्रता के महत्व और राष्ट्रीय कर्तव्यों से जोड़ने का सार्थक माध्यम है।

इतिहास को भूलने वाला राष्ट्र अपनी पहचान खो देता है : सरदार परमिंदर सिंह

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परमिंदर सिंह ने कहा कि धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए गुरुओं ने महान बलिदान दिए। उनका त्याग और संघर्ष भारतीय इतिहास की गौरवशाली विरासत है। उन्होंने कहा कि जो देश अपने इतिहास को भूल जाता है, वह अपना वजूद खो देता है। शहीदों और महापुरुषों के बलिदान का स्मरण करना केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय पहचान और गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का दायित्व भी है।

शहीदों का तर्पण राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक : गिरीश चंद्र मिश्र

राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि गिरीश चंद्र मिश्र ने कहा कि देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद सदैव पूजनीय हैं। इन महान आत्माओं ने व्यक्तिगत जीवन, परिवार और सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र की स्वतंत्रता, सुरक्षा और गौरव के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। ऐसे शहीदों का तर्पण एवं श्रद्धार्पण उनके प्रति हमारी कृतज्ञता, सम्मान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बलिदानियों के आदर्शों को आत्मसात कर ही राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का सच्चा निर्वहन किया जा सकता है।

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क्रांतिकारियों के सपनों का भारत बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि : साधक राजकुमार

सुमंगलम परिवार के सचिव साधक राजकुमार ने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने अपना प्राणोत्सर्ग करके देश को स्वतंत्रता दिलाई, उनके सपनों का भारत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को देश के लिए जीने का संकल्प लेना चाहिए। शहीद पितरों का तर्पण आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम, त्याग, सेवा और समर्पण के संस्कार विकसित करता है। ऐसे आयोजन युवाओं को यह एहसास कराते हैं कि आज हम जिस स्वतंत्रता और सुरक्षा का अनुभव कर रहे हैं, उसके पीछे असंख्य वीरों का त्याग और बलिदान है। राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव ही उन बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

शहीदों के त्याग और समर्पण को नमन करना हमारा पुनीत कर्तव्य : भारत दीक्षित

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाजपा मुख्यालय प्रभारी भारत दीक्षित ने कहा कि जिन क्रांतिवीरों के बलिदान से राष्ट्र का जीवन निरंतर आलोकित है, उन वीर सपूतों के त्याग, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा को नमन करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। शहीदों का सम्मान केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा करते हुए समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना ही बलिदानियों के प्रति सच्ची कृतज्ञता है।

राष्ट्रीय चेतना और एकता को मजबूत करता है शहीद तर्पण : सुभाष चंद्र अग्रवाल

कर्त्तव्य�फाउंडेशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्रवाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि शहीद तर्पण का आयोजन समाज में राष्ट्रीय चेतना, एकता और समर्पण की भावना को प्रबल करता है। राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों का स्मरण नागरिकों को देशहित सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। एक समृद्ध, सशक्त और सुरक्षित राष्ट्र के निर्माण के लिए समाज में राष्ट्रीय उत्तरदायित्व, परस्पर एकता और देश के प्रति समर्पण की भावना का मजबूत होना आवश्यक है।

राष्ट्रभक्ति जागृत अभियान से युवाओं को जोड़ने का आह्वान

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कर्त्तव्या फाउंडेशन के महासचिव डॉ. हरनाम सिंह ने राष्ट्रभक्ति जागृत अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहीद पितरों के तर्पण, वंदन एवं श्रद्धार्पण के माध्यम से युवाओं के मन में राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत किया जा सकता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के साथ राष्ट्रहित में सर्वस्व समर्पण की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बलिदानियों के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्रसेवा की भावना को निरंतर मजबूत करने पर जोर दिया।

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शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प, अतिथियों के प्रति जताया आभार

कार्यक्रम के समापन पर आयोजक साधक�राजकुमार जी ने उपस्थित अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विगत कई वर्षों से इस कार्यक्रम को किया जा रहा है जो युवाओं में राष्ट्रभक्ति का संचार करता है। इस अवसर पर शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करने, राष्ट्र की एकता-अखंडता की रक्षा करने, राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाने और भावी पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम के संस्कार विकसित करने का संकल्प दोहराया गया।

आयोजन का संदेश स्पष्ट रहा कि पितृ विसर्जन के अवसर पर शहीद पितरों का स्मरण केवल श्रद्धा अर्पित करने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को याद करने का अवसर भी है। जिन वीरों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उनके बलिदान को अक्षुण्ण रखना और उनके सपनों के भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।