नाधा क्षेत्र में निजी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे सवाल, मानकों की जांच की मांग

नाधा क्षेत्र में निजी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे सवाल, मानकों की जांच की मांग

 

बदायूं। दहगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) क्षेत्र के नाधा में संचालित निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि क्षेत्र में कई निजी स्वास्थ्य संस्थान आवश्यक मानकों और पंजीकरण के बिना संचालित हो रहे हैं।

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के साथ-साथ प्रसव और ऑपरेशन जैसी चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। आरोप है कि कुछ संचालकों द्वारा पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता एवं आवश्यक अनुमति के बिना ऐसी सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

राधा रानी हॉस्पिटल को लेकर भी स्थानीय स्तर पर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि वहां डिग्री एवं आवश्यक योग्यता को लेकर सवालों के घेरे में बताए जा रहे चिकित्सकों द्वारा प्रसव से लेकर ऑपरेशन तक की सेवाएं कराई जाती हैं। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में संबंधित अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और किए जा रहे उपचार की स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच किया जाना आवश्यक बताया जा रहा है।

 

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में बिना पंजीकरण या निर्धारित मानकों के स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों की जांच केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से होनी चाहिए, ताकि मरीजों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।

 

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग नाधा क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों और लैबों के पंजीकरण, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं तथा प्रसव एवं ऑपरेशन जैसी सेवाओं के लिए निर्धारित मानकों की जांच कब करता है और जांच में यदि कोई अनियमितता मिलती है तो क्या कार्रवाई की जाती है।

 

नोट: किसी भी अस्पताल या चिकित्सक के संबंध में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।