झांसी वर्कशॉप का कमाल: एलएचबी कोचों में अब 20 गुना ज्यादा कचरा हो सकेगा जमा

झांसी वर्कशॉप का कमाल: एलएचबी कोचों में अब 20 गुना ज्यादा कचरा हो सकेगा जमा

18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हुई क्षमता, यात्रियों को मिलेगी राहत; पटरियों पर कचरा फेंकने की समस्या पर भी लगेगा अंकुश

झांसी। रेल यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में वैगन मरम्मत कारखाना, झांसी ने एक महत्वपूर्ण नवाचार किया है। कारखाने ने एलएचबी कोचों के लिए उच्च क्षमता वाली संशोधित कचरा निपटान प्रणाली का सफल प्रोटोटाइप तैयार किया है। नई व्यवस्था से कचरा रखने की क्षमता करीब 20 गुना बढ़कर 18 लीटर से 367.4 लीटर हो गई है।

लंबी दूरी की यात्रा में मिलेगी बड़ी राहत

वर्तमान व्यवस्था में एलएचबी कोचों के केबिन स्तर पर केवल दो डस्टबिन होते हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 15 से 20 लीटर रहती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण डस्टबिन जल्दी भर जाते हैं। इससे कई बार कचरा केबिन में फैलने के साथ यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए झांसी वर्कशॉप ने ऐसी प्रणाली विकसित की है, जिसमें यात्रियों द्वारा डाला गया कचरा गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से सीधे कोच के निचले हिस्से में लगे संग्रह टैंक तक पहुंच जाएगा।

तीन प्रमुख हिस्सों से तैयार की गई प्रणाली

नई कचरा निपटान प्रणाली में तीन प्रमुख घटकों को जोड़ा गया है। इनमें यात्रियों की आसान पहुंच के लिए फर्श पर लगाया गया गारबेज ड्रॉप बॉक्स, केबिन और कोच के निचले हिस्से के बीच कचरे को पहुंचाने वाला सेंट्रल कनेक्टर तथा अंडरगियर में लगाया गया स्टेनलेस स्टील गारबेज कलेक्टर शामिल है।

इस व्यवस्था से कचरा सीधे संग्रह टैंक में पहुंच जाएगा। इससे केबिन में कचरा जमा होने और बदबू फैलने की समस्या काफी हद तक कम होगी।

सफाई और कचरा निकालना भी होगा आसान

नई प्रणाली के कलेक्टर टैंक में विशेष 3:10 टेपर डिजाइन दिया गया है, जिससे गंतव्य या डिपो पर कचरे को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा। ड्रॉप बॉक्स और कलेक्टर दोनों की दो तरफ से धुलाई और सैनिटाइजेशन की सुविधा भी उपलब्ध है।

सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान डस्टबिन को बार-बार खाली करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही यात्रियों द्वारा चलती ट्रेन से पटरियों पर कचरा फेंकने की समस्या पर भी प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।

आरडीएसओ को भेजा गया प्रोटोटाइप

झांसी वर्कशॉप ने इस नई प्रणाली को एक एलएचबी कोच में सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया है। अब इस नवाचार को औपचारिक निरीक्षण के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। आरडीएसओ के निरीक्षण और सुझावों के बाद इस प्रणाली को भारतीय रेल के एलएचबी कोचों में व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

यह नवाचार रेल यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर यात्रा अनुभव देने के साथ ?स्वच्छ रेल, स्वच्छ पटरी? की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।