छात्रावासों में मेस कटौती पर रोक और अधीक्षक संवर्ग के पुनर्गठन की मांग

बैकुंठपुर। छात्रावासों के संचालन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं, ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था और मेस राशि में कटौती को लेकर सुधार की मांग उठाई गई है। 28 अक्टूबर 2026 को तैयार किए गए मांग-पत्र में अधीक्षक संवर्ग के कैडर पुनर्गठन, शिक्षक संवर्ग के प्रभारी अधीक्षकों को VSK ऐप से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता से छूट देने तथा छात्रावासों में भोजन व्यवस्था के लिए व्यावहारिक नियम लागू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। मांग-पत्र में कहा गया है कि अधीक्षक पद पर भर्ती होने के बाद कर्मचारियों को पूरी सेवावधि उसी पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त होना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों को सेवा के दौरान पदोन्नति और आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए कैडर पुनर्गठन की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। शिक्षक संवर्ग के प्रभारी अधीक्षकों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया है। मांग के अनुसार, इन कर्मचारियों को विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ गैर-शैक्षणिक दायित्व, छात्रावास संचालन, विद्यार्थियों के पंजी संधारण और बीमार विद्यार्थियों की देखभाल भी करनी पड़ती है। ऐसे में विद्यालय और छात्रावास दोनों की जिम्मेदारियां निभाते हुए VSK ऐप से अनिवार्य उपस्थिति दर्ज करना कार्य प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्हें इस अनिवार्यता से छूट देने की मांग की गई है।

मेस राशि में कटौती पर रोक की मांग

मांग-पत्र में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों की मेस राशि में होने वाली कटौती पर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि छात्रावासों में 50 से 100 विद्यार्थियों के भोजन की तैयारी के दौरान वास्तविक आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त भोजन बनाकर रखना पड़ता है। गैस, ईंधन, मसाले और परिवहन जैसे खर्च विद्यार्थियों की संख्या में मामूली कमी आने पर भी कम नहीं होते। इसलिए दो-तीन विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के आधार पर मेस राशि में कटौती रोकने तथा न्यूनतम 24 दिन की उपस्थिति पर पूर्ण मेस बजट स्वीकृत करने का प्रावधान लागू करने की मांग की गई है। साथ ही विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा कारणों से 30 दिनों के मेडिकल अवकाश संबंधी प्रावधान को HMS पोर्टल पर लागू करने की बात कही गई है। मांग में छात्रावासों में ऑनलाइन उपस्थिति के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आवश्यक कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे मानव संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई है। सर्वर, नेटवर्क या अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान तक ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्यता में शिथिलता देने तथा वास्तविक खर्च के आधार पर मेस बजट निर्धारित करने की मांग की गई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और छात्रावास संचालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।